भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और अन्य बैंकों में Mahila Samman Saving Scheme SBI के बारे में जानना हर महिला के लिए बेहद जरूरी है। यह सरकार द्वारा महिलाओं के वित्तीय सशक्तिकरण के लिए शुरू की गई एक खास बचत योजना थी। हालांकि, इस योजना में निवेश की अंतिम तिथि 31 मार्च 2025 थी और अब इसमें नए खाते नहीं खोले जा सकते। लेकिन जिन महिलाओं ने इसमें पहले से निवेश किया है, उनके लिए यह जानकारी अभी भी महत्वपूर्ण है। इस लेख में हम आपको इस योजना की पूरी जानकारी देंगे।
Mahila Samman Saving Scheme SBI क्या है
यह योजना केंद्र सरकार द्वारा फरवरी 2023 में बजट भाषण के दौरान घोषित की गई थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे आजादी का अमृत महोत्सव के अवसर पर महिलाओं को समर्पित किया था। यह योजना 1 अप्रैल 2023 से शुरू हुई और दो साल तक यानी 31 मार्च 2025 तक चली। Mahila Samman Saving Scheme SBI और अन्य बैंकों तथा डाकघरों में उपलब्ध थी। इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं को बचत के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें वित्तीय स्वतंत्रता देना था।
योजना की खास बात यह थी कि इसमें बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट से ज्यादा ब्याज मिलता था। इसमें सिर्फ महिलाएं और बालिकाओं के नाम पर खाता खोला जा सकता था। यह पूरी तरह सरकार समर्थित योजना थी, इसलिए इसमें कोई जोखिम नहीं था। योजना में पैसा पूरी तरह सुरक्षित था और तय दर पर ब्याज मिलता था।
योजना की मुख्य विशेषताएं
इस योजना में कई आकर्षक विशेषताएं थीं जो इसे महिलाओं के लिए खास बनाती थीं।
ब्याज दर
योजना में 7.5 प्रतिशत वार्षिक की फिक्स्ड ब्याज दर मिलती थी। यह ब्याज तिमाही आधार पर जमा होता था यानी हर तीन महीने में ब्याज खाते में जुड़ता था। यह दर दो साल की अवधि के लिए तय थी और इसमें कोई बदलाव नहीं होता था। SBI और अन्य बैंकों की दो साल की फिक्स्ड डिपॉजिट में आमतौर पर 6.5 से 7 प्रतिशत ब्याज मिलता है, जबकि इस योजना में 7.5 प्रतिशत मिलता था।
जमा राशि की सीमा
योजना में न्यूनतम 1000 रुपये से शुरुआत की जा सकती थी। इसके बाद 100 रुपये के गुणांक में कोई भी राशि जमा की जा सकती थी। अधिकतम जमा सीमा 2 लाख रुपये थी। यह सीमा किसी एक महिला के सभी खातों को मिलाकर थी। यानी अगर किसी महिला ने एक से ज्यादा खाते खोले थे, तो सभी में कुल मिलाकर 2 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होना चाहिए था।
अवधि और परिपक्वता
योजना की अवधि खाता खोलने की तारीख से ठीक दो साल थी। इसमें कोई लॉक-इन पीरियड नहीं था, लेकिन समय से पहले बंद करने पर ब्याज कम मिलता था। दो साल पूरे होने पर खाताधारक को मूल राशि और पूरा ब्याज एक साथ मिलता था। ब्याज की गणना तिमाही चक्रवृद्धि के आधार पर होती थी, लेकिन भुगतान खाता बंद होने पर होता था।
आंशिक निकासी
योजना में एक साल पूरा होने के बाद 40 प्रतिशत तक आंशिक निकासी की सुविधा थी। यह सुविधा उन महिलाओं के लिए फायदेमंद थी जिन्हें अचानक पैसों की जरूरत पड़ सकती थी। आंशिक निकासी के लिए डाकघर या बैंक में आवेदन करना होता था और कुछ दस्तावेज जमा करने होते थे।
पात्रता मानदंड
योजना में खाता खोलने के लिए कुछ शर्तें तय थीं।
आवेदक की योग्यता
केवल भारतीय नागरिक महिलाएं और बालिकाएं ही इस योजना के लिए पात्र थीं। पुरुष इस योजना में खाता नहीं खोल सकते थे। महिलाओं की उम्र की कोई सीमा नहीं थी, यानी किसी भी उम्र की महिला खाता खोल सकती थी। नाबालिग बालिकाओं के लिए उनके अभिभावक खाता खोल सकते थे और संचालित कर सकते थे।
खाते के प्रकार
योजना में केवल सिंगल होल्डर खाता यानी एकल खाता ही खोला जा सकता था। ज्वाइंट खाता या संयुक्त खाता नहीं खोला जा सकता था। एक महिला एक से ज्यादा खाते खोल सकती थी, लेकिन दो खातों के बीच कम से कम तीन महीने का अंतर होना जरूरी था। सभी खातों में कुल जमा राशि 2 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए थी।
SBI और अन्य बैंकों में खाता कैसे खोलें
हालांकि अब नए खाते नहीं खोले जा सकते, लेकिन प्रक्रिया को समझना जरूरी है।
SBI में आवेदन प्रक्रिया
SBI की किसी भी शाखा में जाकर महिला सम्मान बचत पत्र का फॉर्म मांगा जा सकता था। फॉर्म SBI की वेबसाइट से भी डाउनलोड किया जा सकता था। फॉर्म में सभी व्यक्तिगत जानकारी जैसे नाम, पता, जन्मतिथि, आधार नंबर, पैन नंबर भरना होता था। नामांकन विवरण भरना अनिवार्य था। फॉर्म के साथ केवाईसी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो और पते का प्रमाण संलग्न करना होता था। जमा राशि नकद या चेक से दी जा सकती थी। सभी दस्तावेज जमा करने के बाद बैंक एक प्रमाण पत्र देता था जो निवेश का सबूत होता था।
डाकघर में आवेदन
डाकघर में भी इसी तरह की प्रक्रिया थी। इंडिया पोस्ट की वेबसाइट से फॉर्म डाउनलोड किया जा सकता था या नजदीकी डाकघर से लिया जा सकता था। फॉर्म में पोस्टमास्टर का पता लिखना होता था। खाते का नाम महिला सम्मान बचत प्रमाणपत्र लिखना जरूरी था। बाकी प्रक्रिया बैंक जैसी ही थी। डाकघर में जमा राशि नकद या चेक से दी जा सकती थी।
जरूरी दस्तावेज
आधार कार्ड पहचान और पते के प्रमाण के लिए अनिवार्य था। पैन कार्ड भी जरूरी था। दो पासपोर्ट साइज फोटो चाहिए थी। पते के प्रमाण के लिए बिजली बिल, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या वोटर आईडी में से कोई एक दस्तावेज चाहिए था। अगर नाबालिग के नाम खाता खोला जा रहा था तो जन्म प्रमाण पत्र और अभिभावक के दस्तावेज भी जरूरी थे।
ब्याज की गणना और मैच्योरिटी राशि
योजना में ब्याज तिमाही चक्रवृद्धि के आधार पर जुड़ता था।
गणना का उदाहरण
मान लीजिए किसी महिला ने 2 लाख रुपये जमा किए। पहले साल में 7.5 प्रतिशत की दर से 15,000 रुपये ब्याज मिलेगा। दूसरे साल चक्रवृद्धि के कारण 16,125 रुपये ब्याज मिलेगा। दो साल बाद कुल 2,31,125 रुपये मिलेंगे। इसमें 2 लाख रुपये मूल राशि और 31,125 रुपये ब्याज होगा। SBI में ऑनलाइन कैलकुलेटर उपलब्ध था जिससे सटीक गणना की जा सकती थी।
मैच्योरिटी पर भुगतान
खाता मैच्योर होने पर पूरी राशि एक साथ मिलती थी। अब जून 2025 से इलेक्ट्रॉनिक क्लियरेंस सर्विस (ECS) की सुविधा शुरू हो गई है। इससे मैच्योरिटी राशि सीधे किसी भी बैंक खाते में ट्रांसफर हो सकती है। पहले यह राशि केवल डाकघर से या उसी बैंक के खाते में मिलती थी। अब महिलाएं अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी बैंक खाते में राशि ले सकती हैं।
समय से पहले बंद करने के नियम
कुछ परिस्थितियों में खाता दो साल से पहले बंद किया जा सकता था।
बिना कारण बंद करना
अगर खाता खोलने के छह महीने बाद बिना कोई कारण बताए बंद किया जाता था, तो केवल 5.5 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलता था। यह नियमित 7.5 प्रतिशत से 2 प्रतिशत कम था। यह नियम समय से पहले निकासी को हतोत्साहित करने के लिए था।
विशेष परिस्थितियों में
खाताधारक की मृत्यु होने पर नॉमिनी या कानूनी उत्तराधिकारी खाता बंद कर सकते थे। इस स्थिति में पूरी मूल राशि और नियमित 7.5 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलता था। जीवन के लिए खतरनाक बीमारी होने पर भी खाता बंद किया जा सकता था। इसके लिए मेडिकल प्रमाण पत्र जमा करना होता था। अभिभावक की मृत्यु होने पर भी नाबालिग के खाते को बंद किया जा सकता था, लेकिन जरूरी दस्तावेज जमा करने होते थे।
टैक्स से जुड़े नियम
योजना में टैक्स के कुछ खास नियम थे।
आयकर में छूट
इस योजना में निवेश पर आयकर की धारा 80C के तहत कोई छूट नहीं मिलती थी। यानी जमा की गई राशि को टैक्स बचत के लिए नहीं दिखाया जा सकता था। यह PPF और सुकन्या समृद्धि योजना से अलग था जहां 80C के तहत छूट मिलती है।
TDS नियम
योजना से मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्सेबल था। इसे अन्य स्रोतों से आय के तहत दिखाना होता था। लेकिन अगर ब्याज 40,000 रुपये से कम था तो कोई TDS नहीं कटता था। वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा 50,000 रुपये थी। ज्यादातर मामलों में दो साल का ब्याज 40,000 रुपये से कम ही रहता था, इसलिए TDS की चिंता नहीं थी।
योजना बंद होने की जानकारी
31 मार्च 2025 के बाद इस योजना में नए निवेश बंद हो गए हैं।
सरकार का निर्णय
आर्थिक मामलों के विभाग, वित्त मंत्रालय ने 27 मार्च 2025 को आधिकारिक पत्र जारी किया। इसमें बताया गया कि योजना 31 मार्च 2025 तक ही जारी रहेगी। डाक विभाग ने 28 मार्च 2025 को SB आदेश संख्या 03/2025 जारी करके इसकी पुष्टि की। 1 फरवरी 2025 को पेश किए गए बजट 2025 में भी इस योजना को आगे बढ़ाने की कोई घोषणा नहीं की गई। यह एक बार की योजना थी जो आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर शुरू की गई थी।
मौजूदा खातों की स्थिति
जिन महिलाओं ने 31 मार्च 2025 से पहले खाता खोल लिया था, उनके खाते सामान्य रूप से चलते रहेंगे। उन्हें पूरे दो साल तक 7.5 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलता रहेगा। मैच्योरिटी पर उन्हें पूरी राशि मिलेगी। योजना बंद होने का मतलब केवल यह है कि अब नए खाते नहीं खोले जा सकते। पुराने खाते प्रभावित नहीं हुए हैं।
वैकल्पिक बचत योजनाएं
महिलाओं के लिए अन्य बचत विकल्प भी उपलब्ध हैं।
सुकन्या समृद्धि योजना
यह योजना 10 साल से कम उम्र की बालिकाओं के लिए है। इसमें 8 प्रतिशत से ज्यादा ब्याज मिलता है। यह लंबी अवधि की योजना है जो 21 साल में मैच्योर होती है। इसमें धारा 80C के तहत टैक्स छूट भी मिलती है। यह बेटियों की शिक्षा और शादी के लिए अच्छी योजना है।
पब्लिक प्रोविडेंट फंड
PPF में 15 साल की लंबी अवधि होती है। वर्तमान में इसमें 7.1 प्रतिशत ब्याज मिल रहा है। यह पूरी तरह टैक्स फ्री योजना है। निवेश, ब्याज और मैच्योरिटी राशि तीनों पर टैक्स नहीं लगता। यह रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए बेहतरीन विकल्प है।
सीनियर सिटीजंस सेविंग स्कीम
यह योजना 60 साल या उससे ज्यादा उम्र की महिलाओं के लिए है। इसमें 8.2 प्रतिशत ब्याज मिलता है। यह सबसे ज्यादा ब्याज देने वाली सरकारी योजनाओं में से एक है। अधिकतम 30 लाख रुपये तक निवेश किया जा सकता है। यह पांच साल की योजना है जिसे तीन साल के लिए बढ़ाया भी जा सकता है।
(FAQs)
प्रश्न 1: क्या अब Mahila Samman Saving Scheme SBI में नया खाता खोल सकते हैं? उत्तर: नहीं, 31 मार्च 2025 के बाद इस योजना में नए खाते नहीं खोले जा सकते। यह योजना बंद हो चुकी है और सरकार ने इसे आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है।
प्रश्न 2: जिन महिलाओं ने पहले से खाता खोल रखा है, उनका क्या होगा? उत्तर: जिन महिलाओं ने 31 मार्च 2025 से पहले खाता खोल लिया था, उनके खाते सामान्य रूप से चलते रहेंगे और मैच्योरिटी पर उन्हें 7.5 प्रतिशत ब्याज के साथ पूरी राशि मिलेगी।
प्रश्न 3: क्या Mahila Samman Saving Scheme SBI में निवेश पर टैक्स छूट मिलती थी? उत्तर: नहीं, इस योजना में निवेश पर धारा 80C के तहत कोई टैक्स छूट नहीं मिलती थी, लेकिन अगर ब्याज 40,000 रुपये से कम था तो TDS नहीं कटता था।
प्रश्न 4: क्या पुरुष इस योजना में खाता खोल सकते थे? उत्तर: नहीं, यह योजना केवल महिलाओं और बालिकाओं के लिए थी। पुरुष इस योजना में खाता नहीं खोल सकते थे, यहां तक कि नाबालिग बेटी के अभिभावक के रूप में भी नहीं।
निष्कर्ष
Mahila Samman Saving Scheme SBI महिलाओं के लिए एक बेहतरीन बचत योजना थी जो अब बंद हो चुकी है। हालांकि, जिन महिलाओं ने इसमें निवेश किया है, उन्हें पूरा लाभ मिलेगा। महिलाओं को अपनी बचत के लिए अन्य सरकारी योजनाओं जैसे सुकन्या समृद्धि योजना, PPF और वरिष्ठ नागरिक बचत योजना पर भी विचार करना चाहिए।








