राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को Mid Day Meal Menu Rajasthan के तहत हर दिन पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन मिलता है। अब इस योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (PM POSHAN) योजना कर दिया गया है। यह योजना 2021-22 से 2025-26 तक चलने वाली केंद्र प्रायोजित योजना है जिसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को पोषण देना और स्कूलों में उनकी उपस्थिति बढ़ाना है।
अगर आप राजस्थान के किसी सरकारी स्कूल के अभिभावक, शिक्षक या छात्र हैं तो आपके मन में यह सवाल जरूर होगा कि 2025 में मिड डे मील में बच्चों को कौन-कौन से व्यंजन मिलते हैं। इस लेख में हम आपको राजस्थान के मिड डे मील के ताजा साप्ताहिक मेन्यू, पोषक तत्वों की मात्रा और इस योजना से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी विस्तार से बताएंगे।
राजस्थान में Mid Day Meal Menu का साप्ताहिक चार्ट 2025
राजस्थान सरकार ने मिड डे मील के लिए एक विशेष साप्ताहिक मेन्यू तैयार किया है जो सभी सरकारी और अनुदान प्राप्त स्कूलों में लागू होता है। यह मेन्यू सप्ताह के हर दिन के लिए अलग-अलग व्यंजन निर्धारित करता है ताकि बच्चों को विविधता और पूर्ण पोषण मिल सके।
राजस्थान का मानक साप्ताहिक मेन्यू:
| दिन | व्यंजन | साथ में |
|---|---|---|
| सोमवार | चपाती + सब्जी + दाल | मौसमी फल (सप्ताह में एक बार) |
| मंगलवार | दाल + चावल + सब्जी | – |
| बुधवार | चपाती + दाल | – |
| गुरुवार | खिचड़ी (दाल, चावल, सब्जी मिक्स) | – |
| शुक्रवार | चपाती + सब्जी + दाल | – |
| शनिवार | मिक्स व्यंजन (सब्जी-रोटी या चावल-दाल) | मौसमी फल या मिठाई |
यह मेन्यू राजस्थान शिक्षा विभाग द्वारा स्वीकृत है और स्कूलों में नियमित रूप से इसका पालन किया जाता है। कुछ जिलों में स्थानीय जरूरत के अनुसार व्यंजनों में मामूली बदलाव हो सकता है, लेकिन पोषण मानक वही रहते हैं।
मिड डे मील में मिलने वाले राजस्थानी व्यंजन
राजस्थान सरकार ने PM POSHAN योजना में स्थानीय पारंपरिक व्यंजनों को भी शामिल किया है। यह व्यंजन न केवल पौष्टिक हैं बल्कि बच्चों को बहुत पसंद भी आते हैं:
दाल-बाटी: यह राजस्थान का सबसे प्रसिद्ध व्यंजन है जो कुछ स्कूलों में खास दिनों पर बनाया जाता है। यह गेहूं के आटे से बनी बाटी और पौष्टिक दाल का संयोजन है।
घूघरी (घूंघरी): यह राजस्थान की पारंपरिक खिचड़ी है जो मोठ की दाल और चावल से बनती है। यह प्रोटीन से भरपूर होती है।
दलिया: गेहूं का दलिया बच्चों के लिए बहुत पौष्टिक और पचने में आसान होता है। इसे सब्जियों के साथ बनाया जाता है।
खिचड़ी: दाल, चावल और सब्जियों का मिश्रण होने के कारण यह संतुलित भोजन माना जाता है।
पुलाव: चावल और सब्जियों से बना यह व्यंजन बच्चों को बहुत पसंद आता है।
चपाती-सब्जी: यह सबसे आम और पौष्टिक व्यंजन है जो लगभग हर दिन किसी न किसी रूप में परोसा जाता है।
इन सभी व्यंजनों में सब्जियां, दालें और अनाज का संतुलित मिश्रण होता है जो बच्चों को आवश्यक पोषण प्रदान करता है।
कक्षावार पोषण मानक और भोजन की मात्रा (2025 अपडेट)
राजस्थान में PM POSHAN योजना में कक्षा के अनुसार अलग-अलग मात्रा में भोजन और पोषक तत्व दिए जाते हैं। मई 2025 से खाना पकाने की लागत में 9.5% की वृद्धि की गई है:
कक्षा 1 से 5 के लिए:
- अनाज (गेहूं/चावल): प्रति छात्र प्रतिदिन 100 ग्राम
- कैलोरी: 450 कैलोरी
- प्रोटीन: 12 ग्राम
- खाना पकाने की लागत: रु. 4.97 प्रति छात्र प्रतिदिन (मई 2025 से पहले)
कक्षा 6 से 8 के लिए:
- अनाज (गेहूं/चावल): प्रति छात्र प्रतिदिन 150 ग्राम
- कैलोरी: 700 कैलोरी
- प्रोटीन: 20 ग्राम
- खाना पकाने की लागत: रु. 7.45 प्रति छात्र प्रतिदिन (मई 2025 से पहले)
अनाज की दर (NFSA के अनुसार):
- मोटा अनाज: रु. 1 प्रति किलो
- गेहूं: रु. 2 प्रति किलो
- चावल: रु. 3 प्रति किलो
यह मानक सुनिश्चित करते हैं कि बच्चों को उनकी उम्र और शारीरिक जरूरतों के अनुसार पर्याप्त पोषण मिले। मई 2025 से महंगाई की दर को देखते हुए खाना पकाने की लागत में 9.5% की वृद्धि की गई है जिससे केंद्र सरकार को अतिरिक्त 954 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।
राजस्थान में PM POSHAN योजना का इतिहास और वर्तमान स्थिति
भारत में मिड डे मील योजना 15 अगस्त 1995 को केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई थी। शुरुआत में इसमें बच्चों को सूखा राशन या गेहूं दिया जाता था। लेकिन सितंबर 2004 में इस कार्यक्रम में बड़ा बदलाव किया गया और पका हुआ गर्म भोजन देने की व्यवस्था शुरू हुई।
2021-22 में इस योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (PM POSHAN) कर दिया गया। यह योजना 2025-26 तक चलेगी और इसके लिए कुल 1,30,794.90 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।
राजस्थान में PM POSHAN की वर्तमान स्थिति (2025):
- कुल लाभार्थी स्कूल: लगभग 71,344 संस्थान
- पोर्टल पर डेटा वाले स्कूल: 66,506 स्कूल
- SMS द्वारा दैनिक रिपोर्ट भेजने वाले स्कूल: लगभग 64,022 (96.40%)
- टोल फ्री नंबर: 15544
- लाभान्वित बच्चे: लगभग 41 लाख से अधिक
राजस्थान में यह योजना सभी सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों, अनुदानित स्कूलों, शिक्षा गारंटी योजना केंद्रों, मदरसों और मकतबों में लागू है।
मिड डे मील बनाने की जिम्मेदारी किसकी है?
राजस्थान में मिड डे मील तैयार करने और परोसने की जिम्मेदारी तीन प्रकार की संस्थाओं को दी गई है:
स्कूल प्रबंधन समितियां (SMC): अधिकांश स्कूलों में स्कूल प्रबंधन समितियां ही खाना बनाने की देखरेख करती हैं। इन समितियों में शिक्षक, अभिभावक और निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं।
महिला स्वयं सहायता समूह (SHG): कई स्थानों पर महिला स्वयं सहायता समूह और अन्नपूर्णा महिला सहकारी समितियां खाना बनाने का काम संभालती हैं। यह महिलाओं को रोजगार भी प्रदान करता है।
NGO और निजी संस्थाएं: कुछ जिलों में अक्षय पात्र फाउंडेशन, इस्कॉन फाउंडेशन जैसी संस्थाएं केंद्रीकृत रसोई (Centralized Kitchen) के माध्यम से बड़े पैमाने पर भोजन तैयार करती हैं।
राजस्थान में कुल 1,11,684 रसोइया-सह-सहायक (Cook-cum-Helpers) कार्यरत हैं जिनमें से 89% महिलाएं हैं। इन रसोइयों को प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है।
मिड डे मील की गुणवत्ता की जांच कैसे होती है?
राजस्थान सरकार PM POSHAN योजना की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कई स्तरों पर निगरानी व्यवस्था रखती है:
राज्य स्तरीय समिति: मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय संचालन एवं निगरानी समिति कार्य करती है जिसमें विभिन्न सचिव, सांसद और विधायक शामिल होते हैं।
जिला स्तरीय समिति: हर जिले में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय निगरानी समिति (DLMC) बनाई गई है।
ब्लॉक स्तरीय समिति: प्रत्येक ब्लॉक में उप खंड अधिकारी की देखरेख में समिति कार्य करती है।
प्रयोगशाला परीक्षण: मिड डे मील के नमूने NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में भेजे जाते हैं जहां पोषक तत्वों का विश्लेषण किया जाता है।
SMS आधारित रिपोर्टिंग: राजस्थान में SMS आधारित स्वचालित रिपोर्टिंग प्रणाली लागू है जिसमें लगभग 64,022 स्कूलों की जानकारी रोजाना टोल फ्री नंबर 15544 पर SMS के माध्यम से प्राप्त होती है।
अचानक निरीक्षण: जिला स्तरीय अधिकारी नियमित अचानक निरीक्षण करते हैं।
यह सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करती हैं कि बच्चों को स्वच्छ, पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन मिले।
PM POSHAN योजना के फायदे
राजस्थान में PM POSHAN योजना ने शिक्षा और पोषण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके कुछ प्रमुख फायदे हैं:
पोषण में सुधार: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5, 2019-21) के अनुसार 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में स्टंटिंग 38.4% से घटकर 35.5% हो गई है। कम वजन वाले बच्चों का प्रतिशत 35.8% से घटकर 32.1% हो गया है।
स्कूल में उपस्थिति बढ़ी: मुफ्त भोजन की सुविधा के कारण गरीब परिवारों के बच्चे नियमित रूप से स्कूल आते हैं।
नामांकन में वृद्धि: इस योजना के कारण स्कूलों में नए बच्चों का नामांकन बढ़ा है। देशभर में लगभग 11.80 करोड़ बच्चे और 11.20 लाख स्कूल लाभान्वित हो रहे हैं।
ड्रॉपआउट दर में कमी: भोजन की सुविधा होने से बच्चे स्कूल छोड़कर नहीं जाते और अपनी पढ़ाई जारी रखते हैं।
सामाजिक समानता: स्कूल में सभी बच्चे एक साथ बैठकर भोजन करते हैं जिससे जाति और वर्ग के भेदभाव कम होते हैं।
महिलाओं को रोजगार: रसोइया-सह-सहायक के पद पर हजारों महिलाओं को रोजगार मिला है जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है।
उत्सव भोज (Tithi Bhojan): राजस्थान में “उत्सव भोज” योजना भी चलाई जा रही है जिसमें समुदाय और परिवार के सदस्य स्कूली बच्चों को स्वैच्छिक रूप से मिठाई, नाश्ता या पूरा भोजन प्रदान करते हैं।
PM POSHAN योजना का बजट और खर्च (2025)
PM POSHAN योजना की लागत केंद्र सरकार और राज्य सरकार मिलकर वहन करते हैं। केंद्र सरकार 60% और राज्य सरकार 40% खर्च वहन करती है।
केंद्र सरकार की जिम्मेदारी:
- पूरा अनाज (गेहूं/चावल) मुफ्त में उपलब्ध कराना
- खाना पकाने की लागत के लिए धनराशि देना
- दालें, सब्जियां, तेल, मसाले और ईंधन की लागत
राज्य सरकार की जिम्मेदारी:
- रसोई-घर निर्माण
- गैस कनेक्शन और सिलेंडर
- बर्तन और अन्य उपकरण
- रसोइयों के वेतन का खर्च
योजना का कुल बजट (2021-22 से 2025-26): रु. 1,30,794.90 करोड़
मई 2025 से लागत में वृद्धि: महंगाई के कारण खाना पकाने की सामग्री की लागत में 9.5% की बृद्धि की गई है। इससे केंद्र सरकार को वित्त वर्ष 2025-26 में अतिरिक्त 954 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।
वर्तमान में कक्षा 1 से 5 के लिए खाना पकाने की लागत 4.97 रुपये प्रति बच्चा प्रतिदिन है और कक्षा 6 से 8 के लिए 7.45 रुपये प्रति बच्चा प्रतिदिन है। यह राशि समय-समय पर महंगाई के अनुसार बढ़ाई जाती है।
गर्मी की छुट्टियों में भी भोजन
PM POSHAN योजना की एक खास बात यह है कि सूखा प्रभावित और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में गर्मी की छुट्टियों के दौरान भी बच्चों को भोजन उपलब्ध कराया जाता है। यह व्यवस्था यह सुनिश्चित करती है कि बच्चों के पोषण में कोई रुकावट न आए।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत प्राथमिक स्कूलों में बालवाटिका (कक्षा 1 से पहले) के बच्चों को भी समग्र शिक्षा के अंतर्गत भोजन प्रदान किया जा रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्रश्न 1: 2025 में राजस्थान के Mid Day Meal Menu में कौन-कौन से व्यंजन मिलते हैं? उत्तर: राजस्थान में मिड डे मील में चपाती-दाल-सब्जी, चावल-दाल, खिचड़ी, दाल-बाटी, घूघरी, दलिया और पुलाव जैसे पौष्टिक व्यंजन मिलते हैं जो साप्ताहिक मेन्यू के अनुसार बदलते रहते हैं।
प्रश्न 2: क्या मिड डे मील योजना का नाम बदल गया है? उत्तर: हां, 2021-22 से इस योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (PM POSHAN) योजना कर दिया गया है। यह योजना 2025-26 तक चलेगी।
प्रश्न 3: राजस्थान में कितने स्कूलों में मिड डे मील योजना चल रही है? उत्तर: राजस्थान में लगभग 71,344 संस्थानों में PM POSHAN योजना चल रही है जिसमें 41 लाख से अधिक बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं। पोर्टल पर 66,506 स्कूलों का डेटा उपलब्ध है।
प्रश्न 4: मिड डे मील की शिकायत के लिए क्या करें? उत्तर: राजस्थान में मिड डे मील से जुड़ी किसी भी समस्या या शिकायत के लिए आप टोल फ्री नंबर 15544 पर SMS भेज सकते हैं या अपने जिले के शिक्षा अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।
निष्कर्ष
राजस्थान में Mid Day Meal Menu यानी अब PM POSHAN योजना बच्चों के पोषण और शिक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रही है। 2025 में इस योजना को और मजबूत बनाया गया है और खाना पकाने की लागत में वृद्धि करके यह सुनिश्चित किया गया है कि महंगाई के बावजूद बच्चों को गुणवत्तापूर्ण भोजन मिलता रहे।
साप्ताहिक मेन्यू में विविधता, स्थानीय व्यंजनों का समावेश और पोषण मानकों का सख्ती से पालन यह दर्शाता है कि सरकार बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर है। दाल-बाटी, घूघरी और खिचड़ी जैसे पारंपरिक राजस्थानी व्यंजन न केवल बच्चों को पसंद आते हैं बल्कि उन्हें अपनी संस्कृति से भी जोड़ते हैं।
अगर आप राजस्थान के किसी स्कूल से जुड़े हैं तो यह सुनिश्चित करें कि आपके स्कूल में भी मिड डे मील का साप्ताहिक मेन्यू सही तरीके से लागू हो रहा है। यह योजना सिर्फ भोजन नहीं बल्कि बच्चों के भविष्य में निवेश है।








