भारत में बिजली वितरण कंपनियां (DISCOMs) लंबे समय से गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रही थीं। इन कंपनियों पर लाखों करोड़ रुपये का कर्ज था और वे बिजली उत्पादन कंपनियों को समय पर भुगतान नहीं कर पा रही थीं। इसी समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए भारत सरकार ने नवंबर 2015 में ujwal discom assurance yojana (उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना) को शुरू किया। इस योजना को संक्षेप में UDAY योजना के नाम से जाना जाता है।
यह योजना बिजली वितरण कंपनियों के वित्तीय और संचालन सुधार के लिए बनाई गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य था कि देश के हर नागरिक को 24 घंटे किफायती और भरोसेमंद बिजली मिल सके। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि UDAY योजना क्या है, इसके उद्देश्य क्या हैं, किन राज्यों ने इसे अपनाया, और इसके क्या फायदे और चुनौतियां रही हैं।
ujwal discom assurance yojana क्या है – योजना की पूरी जानकारी
UDAY का पूरा नाम उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना है। यह भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसे 5 नवंबर 2015 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी। योजना की आधिकारिक घोषणा तत्कालीन ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने नवंबर 2015 में की थी।
इस योजना का मुख्य काम राज्यों की बिजली वितरण कंपनियों को कर्ज के बोझ से मुक्त करना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। DISCOMs बिजली उत्पादन कंपनियों से बिजली खरीदती हैं और उपभोक्ताओं तक पहुंचाती हैं। लेकिन तकनीकी और व्यावसायिक नुकसान, कम टैरिफ दरें, बिजली चोरी और देरी से सब्सिडी मिलने जैसी समस्याओं के कारण ये कंपनियां भारी घाटे में चल रही थीं।
UDAY योजना के तहत राज्य सरकारों को अपनी DISCOMs के 75% कर्ज को अपने ऊपर लेना होता है। बाकी 25% कर्ज के लिए DISCOMs खुद बॉन्ड जारी करती हैं। यह योजना राज्यों के लिए स्वैच्छिक है, यानी कोई भी राज्य अपनी मर्जी से इसमें शामिल हो सकता है।
योजना शुरू होने के कारण – DISCOMs की समस्याएं
UDAY योजना शुरू करने की जरूरत क्यों पड़ी, यह समझना बहुत जरूरी है। भारत में बिजली वितरण कंपनियां कई गंभीर समस्याओं से जूझ रही थीं:
भारी कर्ज का बोझ: 2015 तक DISCOMs पर लगभग 4.3 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज हो गया था। यह राशि बहुत बड़ी थी और इसके ब्याज का भुगतान करना भी मुश्किल हो गया था।
उच्च AT&C नुकसान: एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल (AT&C) नुकसान 2015-16 में लगभग 22% से अधिक था। इसमें बिजली चोरी, पुराने उपकरणों के कारण होने वाला नुकसान और बिल वसूली में कमी शामिल है।
लागत और आय में अंतर: बिजली की आपूर्ति की औसत लागत (ACS) और औसत राजस्व प्राप्ति (ARR) के बीच बड़ा अंतर था। DISCOMs बिजली खरीदने में जितना खर्च करती थीं, उससे कम पैसा वसूल पाती थीं।
देरी से सब्सिडी मिलना: राज्य सरकारें समय पर सब्सिडी नहीं देती थीं, जिससे DISCOMs की आर्थिक स्थिति और खराब होती जाती थी।
बिजली जनरेटरों को भुगतान में देरी: DISCOMs बिजली उत्पादन कंपनियों को समय पर पैसा नहीं दे पाती थीं, जिससे पूरी बिजली आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो रही थी।
इन सभी समस्याओं ने पूरे देश में बिजली आपूर्ति को खतरे में डाल दिया था। इसलिए सरकार ने UDAY योजना लाकर एक व्यापक समाधान पेश किया।
UDAY योजना के मुख्य उद्देश्य
सरकार ने UDAY योजना के लिए कुछ स्पष्ट और महत्वाकांक्षी उद्देश्य निर्धारित किए थे:
कर्ज का बोझ कम करना: राज्य सरकारों द्वारा 75% कर्ज अपने ऊपर लेकर DISCOMs पर ब्याज का बोझ कम करना। राज्य सरकारें कम ब्याज दर पर बॉन्ड जारी कर सकती हैं, जिससे कुल ब्याज लागत घट जाती है।
AT&C नुकसान घटाना: एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल नुकसान को 2018-19 तक लगभग 22% से घटाकर 15% तक लाना था। इसके लिए स्मार्ट मीटर लगाना, पुराने ट्रांसफॉर्मरों को बदलना और बिजली चोरी रोकने जैसे कदम उठाने थे।
ACS-ARR अंतर खत्म करना: बिजली की औसत आपूर्ति लागत और औसत राजस्व प्राप्ति के बीच के अंतर को 2018-19 तक पूरी तरह खत्म करना था। इसका मतलब है कि DISCOMs को कम से कम उतना राजस्व मिले जितना वे बिजली खरीदने में खर्च करती हैं।
परिचालन दक्षता बढ़ाना: अनिवार्य स्मार्ट मीटरिंग, वितरण बुनियादी ढांचे का उन्नयन और ऊर्जा दक्षता उपायों को अपनाना। LED बल्ब, कुशल कृषि पंप, पंखे और एयर कंडीशनर जैसे उपकरणों को बढ़ावा देना।
24×7 बिजली आपूर्ति: सभी नागरिकों को चौबीसों घंटे किफायती और भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराना। यह भारत सरकार का एक प्रमुख लक्ष्य था।
बिजली की लागत कम करना: कोयले की कीमतों को तर्कसंगत बनाना, कोयला स्वैपिंग के जरिए ईंधन लागत कम करना और अंतरराज्यीय ट्रांसमिशन लाइनों को तेजी से पूरा करना।
योजना की मुख्य विशेषताएं और कार्य प्रणाली
UDAY योजना कई महत्वपूर्ण घटकों पर आधारित है। आइए इन्हें विस्तार से समझें:
राज्यों द्वारा कर्ज का अधिग्रहण: राज्य सरकारें 30 सितंबर 2015 तक के DISCOMs के 75% कर्ज को अपने ऊपर लेती हैं। यह कर्ज दो चरणों में लिया जाता था – 2015-16 में 50% और 2016-17 में 25%। राज्य सरकारें इस कर्ज के लिए नॉन-SLR बॉन्ड जारी करती हैं जिनकी परिपक्वता अवधि 10-15 साल होती है।
DISCOMs द्वारा बॉन्ड जारी करना: बाकी 25% कर्ज के लिए DISCOMs खुद बॉन्ड जारी करती हैं। इन बॉन्ड्स पर ब्याज दर राज्य सरकार के बॉन्ड्स की तुलना में थोड़ी अधिक होती है लेकिन पुराने कर्ज की ब्याज दर से कम होती है।
राजकोषीय छूट: राज्य सरकारों द्वारा लिए गए कर्ज को FRBM (Fiscal Responsibility and Budget Management) सीमा से दो साल के लिए छूट दी गई। इससे राज्यों पर राजकोषीय दबाव कम हुआ।
परिचालन सुधार लक्ष्य: राज्यों को निर्धारित समय सीमा में AT&C नुकसान कम करना, ACS-ARR अंतर खत्म करना, स्मार्ट मीटरिंग करना और ऊर्जा दक्षता बढ़ाना अनिवार्य था।
केंद्र सरकार का सहयोग: केंद्र सरकार ने कोयले की आपूर्ति बढ़ाने, कोयले की कीमतें तर्कसंगत बनाने और दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (DDUGJY) तथा एकीकृत विद्युत विकास योजना (IPDS) के तहत अतिरिक्त फंडिंग देने का वादा किया।
MoU पर हस्ताक्षर: योजना में शामिल होने वाले राज्यों को केंद्र सरकार और DISCOMs के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करना जरूरी था। इसमें राज्यों की प्रतिबद्धताएं और लक्ष्य स्पष्ट रूप से लिखे गए थे।
कौन से राज्य शामिल हुए – UDAY में भागीदारी
UDAY योजना स्वैच्छिक थी, लेकिन अधिकतर राज्यों ने इसमें भाग लिया। कुल 27 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों ने UDAY योजना के तहत समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। झारखंड UDAY योजना में शामिल होने वाला पहला राज्य बना।
प्रमुख राज्य: राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, पंजाब, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, तेलंगाना, गुजरात, बिहार, तमिलनाडु और अन्य राज्यों ने इस योजना को अपनाया।
गैर-भागीदार राज्य: ओडिशा और पश्चिम बंगाल ने UDAY योजना में भाग नहीं लिया। इन राज्यों ने अपनी DISCOMs की समस्याओं को हल करने के लिए अलग तरीके अपनाए।
मार्च 2020 तक, 15 राज्यों ने अपनी DISCOMs का लगभग 2 लाख करोड़ रुपये का कर्ज अपने ऊपर ले लिया था। यह एक बहुत बड़ी राशि थी जिसने DISCOMs को तुरंत राहत प्रदान की।
UDAY योजना के लाभ
इस योजना से कई प्रकार के लाभ मिले जिन्होंने बिजली क्षेत्र को सुधारने में मदद की:
ब्याज बोझ में कमी: राज्य सरकारें कम ब्याज दर पर बॉन्ड जारी कर सकती हैं, इसलिए DISCOMs का ब्याज बोझ काफी कम हो गया। इससे हर साल हजारों करोड़ रुपये की बचत हुई।
नकदी प्रवाह में सुधार: कर्ज का बोझ कम होने से DISCOMs के पास अपने परिचालन के लिए अधिक पैसा उपलब्ध हो गया। वे समय पर बिजली जनरेटरों को भुगतान कर सकीं।
AT&C नुकसान में कमी: योजना के पहले कुछ सालों में AT&C नुकसान 23.70% (2015-16) से घटकर 20.73% (2019-20) तक आया। हालांकि यह लक्ष्य से थोड़ा कम था, लेकिन सुधार जरूर हुआ।
बुनियादी ढांचे में सुधार: स्मार्ट मीटर, नए ट्रांसफॉर्मर और आधुनिक उपकरणों की स्थापना से वितरण नेटवर्क मजबूत हुआ। बिजली चोरी कम करने में मदद मिली।
उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा: DISCOMs की वित्तीय स्थिति सुधरने से बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता में सुधार हुआ। कई क्षेत्रों में बिजली कटौती कम हुई।
ऊर्जा दक्षता बढ़ी: LED बल्ब और कुशल उपकरणों के वितरण से बिजली की खपत कम हुई। इससे लोगों के बिजली बिल भी कम हुए और पर्यावरण को भी फायदा हुआ।
निवेश में आकर्षण: योजना से बिजली क्षेत्र में निजी निवेश और भागीदारी बढ़ी। अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं को भी बढ़ावा मिला।
योजना की चुनौतियां और समस्याएं
हालांकि UDAY योजना से कई फायदे हुए, लेकिन कुछ चुनौतियां भी सामने आईं:
लक्ष्य पूरे नहीं हुए: 2018-19 तक AT&C नुकसान को 15% तक लाने का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। 2019-20 में यह 20.73% था जो लक्ष्य से काफी अधिक था।
ACS-ARR अंतर बना रहा: औसत आपूर्ति लागत और औसत राजस्व प्राप्ति के बीच का अंतर पूरी तरह खत्म नहीं हो सका। यह 2015-16 में 0.54 रुपये प्रति यूनिट से घटकर 2019-20 में 0.50 रुपये प्रति यूनिट हुआ।
नुकसान फिर से बढ़ा: 2019 में DISCOMs का नुकसान फिर से बढ़ गया। 2017-18 की तुलना में 2018-19 में नुकसान लगभग दोगुना हो गया। इसका मुख्य कारण बिजली खरीद लागत में वृद्धि थी।
राज्यों पर राजकोषीय दबाव: UDAY बॉन्ड्स पर ब्याज चुकाना और बॉन्ड्स की परिपक्वता पर मूलधन चुकाना राज्यों के लिए एक नया बोझ बन गया। कई राज्य पहले से ही तंग वित्तीय स्थिति में थे।
धीमा कार्यान्वयन: कई राज्यों ने सुधारों को धीमी गति से लागू किया या पूरी तरह से लागू ही नहीं किया। स्मार्ट मीटरिंग और अन्य बुनियादी ढांचे के लक्ष्य पूरे नहीं हुए।
सब्सिडी में देरी: कई राज्य सरकारें समय पर सब्सिडी नहीं दे रही थीं। योजना में यह प्रावधान था कि राज्य धीरे-धीरे DISCOMs के नुकसान का अधिक हिस्सा अपने बजट से देंगे, लेकिन यह नहीं हो पाया।
COVID-19 का प्रभाव: 2020 में कोरोना महामारी के कारण बिजली की मांग घट गई जिससे DISCOMs की आमदनी प्रभावित हुई। कई विश्लेषकों ने कहा कि DISCOMs का कर्ज फिर से 2015 के स्तर पर पहुंच गया।
UDAY 2.0 – योजना का अगला चरण
UDAY योजना के मिले-जुले परिणामों को देखते हुए सरकार ने 2020-21 के केंद्रीय बजट में UDAY 2.0 की घोषणा की। यह योजना का अगला चरण था जिसमें नए सुधारों पर जोर दिया गया:
स्मार्ट प्रीपेड मीटर: पूरे देश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने पर जोर दिया गया। इससे बिल वसूली बेहतर हो और बिजली चोरी कम हो सकती है।
समय पर भुगतान: DISCOMs को बिजली जनरेटरों को समय पर भुगतान करना अनिवार्य बनाया गया। PRAAPTI पोर्टल के जरिए इसकी निगरानी की जाती है।
अल्पकालिक कोयला उपलब्धता: बिजली संयंत्रों के लिए अल्पकालिक आधार पर कोयला उपलब्ध कराने की व्यवस्था।
गैस आधारित संयंत्रों को पुनर्जीवित करना: बंद पड़े गैस आधारित बिजली संयंत्रों को फिर से चालू करने की योजना।
निजी भागीदारी बढ़ाना: बिजली क्षेत्र में निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करना और प्रतिस्पर्धा बढ़ाना।
बेहतर निगरानी: योजना के कार्यान्वयन की नियमित निगरानी और राज्यों को जवाबदेह बनाना।
UDAY 2.0 का उद्देश्य पहली योजना की कमियों को दूर करना और बिजली क्षेत्र में गहरे सुधार लाना है।
योजना का वर्तमान स्थिति और प्रभाव
UDAY योजना की अवधि 2015-16 से 2019-20 तक थी। इस दौरान मिश्रित परिणाम देखने को मिले। कुछ राज्यों ने अच्छा प्रदर्शन किया और अपने नुकसान कम किए, जबकि कुछ राज्यों में स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं हुआ।
2019-20 तक 27 में से 15 राज्यों में शुद्ध नुकसान में कमी देखी गई। तमिलनाडु, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में अभी भी उच्च नुकसान बना हुआ था। बिजली खरीद लागत में वृद्धि एक बड़ी चुनौती बनी रही।
2021-22 में COVID-19 महामारी के प्रभाव से DISCOMs के नुकसान में फिर से तेज वृद्धि हुई। हालांकि, योजना ने कुछ महत्वपूर्ण बदलाव जरूर किए जैसे कि बुनियादी ढांचे में सुधार, स्मार्ट मीटरिंग को बढ़ावा और ऊर्जा दक्षता में वृद्धि।
सरकार की तरफ से यह स्वीकार किया गया कि UDAY योजना सभी समस्याओं का पूर्ण समाधान नहीं थी। अभी भी बहुत काम बाकी है जैसे कि उचित टैरिफ नीति बनाना, बिजली चोरी को पूरी तरह रोकना और DISCOMs को वास्तव में लाभदायक बनाना।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्रश्न 1: ujwal discom assurance yojana किसने और कब शुरू की थी? उत्तर: इस योजना को भारत सरकार ने 5 नवंबर 2015 को मंजूरी दी और तत्कालीन ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने नवंबर 2015 में इसकी घोषणा की थी।
प्रश्न 2: UDAY योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है? उत्तर: योजना का मुख्य उद्देश्य बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) को वित्तीय और परिचालन रूप से मजबूत बनाना, उनका कर्ज कम करना और सभी को 24×7 किफायती बिजली उपलब्ध कराना है।
प्रश्न 3: UDAY योजना में राज्यों की क्या भूमिका है? उत्तर: राज्य सरकारें अपनी DISCOMs के 75% कर्ज को अपने ऊपर लेती हैं और कम ब्याज दर पर बॉन्ड जारी करके उसे चुकाती हैं, साथ ही परिचालन सुधार लक्ष्यों को पूरा करने की जिम्मेदारी लेती हैं।
प्रश्न 4: UDAY 2.0 क्या है और यह पहली योजना से कैसे अलग है? उत्तर: UDAY 2.0 योजना का अगला चरण है जो 2020-21 के बजट में घोषित किया गया था। इसमें स्मार्ट प्रीपेड मीटर, बेहतर निगरानी और निजी भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर है।
निष्कर्ष
उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना भारत के बिजली क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुधार पहल थी। इसने बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय समस्याओं को हल करने का एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। योजना के तहत लाखों करोड़ रुपये का कर्ज राज्य सरकारों ने अपने ऊपर लिया, जिससे DISCOMs को तुरंत राहत मिली।
हालांकि सभी लक्ष्य पूरे नहीं हो सके और कुछ राज्यों में नुकसान फिर से बढ़ गया, लेकिन योजना ने कई सकारात्मक बदलाव जरूर किए। बुनियादी ढांचे में सुधार, स्मार्ट मीटरिंग को बढ़ावा, AT&C नुकसान में कमी और ऊर्जा दक्षता में वृद्धि जैसी उपलब्धियां महत्वपूर्ण हैं।
बिजली क्षेत्र की समस्याएं जटिल और गहरी हैं, इसलिए एक योजना से सब कुछ हल होने की उम्मीद करना उचित नहीं है। UDAY ने एक शुरुआत की है और UDAY 2.0 तथा अन्य नई पहलों से उम्मीद है कि आने वाले समय में भारत के हर नागरिक को 24 घंटे भरोसेमंद और किफायती बिजली मिल सकेगी। योजना की सफलता के लिए राज्य सरकारों की प्रतिबद्धता, बेहतर कार्यान्वयन और निरंतर निगरानी बहुत जरूरी है।








